जैन धर्म

जैन धर्म में गो रक्षण

भगवान महावीर

भगवान महावीर

  • जैन धर्म का मूलाधार अहिंसा होने के कारण जैन लोग गाय तो क्या, किसी पशु-पक्षी को कष्ट नहीं पहुँचाते ।
  • जब जैन धर्म चरम पर था तो जैनी गो रक्षा में सक्रिय थें । उन्होंने विशाल गोशालाएँ निर्मित की और गो पालन को जीवन शैली बनाया । गायों पर क्रूरता, उन्हें भूखा रखना, बोझ से लादना, अंग भंग, सभी पर कानूनी प्रतिबंध था ।
  • गायों की संख्या से किसी के धन का आकलन होता था । एक व्रज गौकुल = १०,००० गायें । सर्वाधिक गायों के १० स्वामियों को ‘राजगृह महाशतक’ एवं ‘काशियचुलनिपिता’ कहाँ जाता था ।
  • महावीर ने अपने अनुयायियों को ६०,००० गायों के पालन का आदेश दिया था ।
  • आनंद ने महावीर का अनुयायी बनकर ८ गोकुल संचालित करने का संकल्प लिया ।

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