जैन धर्म
जैन धर्म में गो रक्षण
- जैन धर्म का मूलाधार अहिंसा होने के कारण जैन लोग गाय तो क्या, किसी पशु-पक्षी को कष्ट नहीं पहुँचाते ।
- जब जैन धर्म चरम पर था तो जैनी गो रक्षा में सक्रिय थें । उन्होंने विशाल गोशालाएँ निर्मित की और गो पालन को जीवन शैली बनाया । गायों पर क्रूरता, उन्हें भूखा रखना, बोझ से लादना, अंग भंग, सभी पर कानूनी प्रतिबंध था ।
- गायों की संख्या से किसी के धन का आकलन होता था । एक व्रज गौकुल = १०,००० गायें । सर्वाधिक गायों के १० स्वामियों को ‘राजगृह महाशतक’ एवं ‘काशियचुलनिपिता’ कहाँ जाता था ।
- महावीर ने अपने अनुयायियों को ६०,००० गायों के पालन का आदेश दिया था ।
- आनंद ने महावीर का अनुयायी बनकर ८ गोकुल संचालित करने का संकल्प लिया ।



