युद्ध क्षेत्र

युद्ध क्षेत्र में गाय की भूमिका

हमारी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ती करने के अलावा गायों ने हमारे लिए लड़ाइयाँ भी लड़ी हैं ।

इतिहास के पन्नों में :

  • हैदराली जब मैसूर के शासक थे, हैदराबाद के निजाम ने चित्रदुर्ग किले पर आक्रमण किया । हैदराली की सेना में अमृत महल बैलों की एक टुकड़ी थी । उसने २३७ बैलों के सींगों पर मशालें बांधकर उनसे निजाम की सेना पर आक्रमण करवाया, परिणाम – ३००० की संख्यावाली आक्रमणकारी सेना की हार ।
  • अफगानिस्तान में कैप्टन जेविन्सन की सेना में अमृत महल बैल थे । उन्होंने उल्लेख किया है कि १८४२ में जब उनकी सेना टेरी पहाडियों की संकीर्ण घाटियों से गुजरी तो १६ घंटे लगातार गाड़ियाँ खींचने के बाद भी बैल प्रसन्नचित्त थे ।
  • सेनापति लार्ड वेलेजली ने पेन्सुलर युद्ध में नेपोलियन पर अपनी विजय का श्रेय अमृत महल बैलों को दिया है ।
  • अमृत महल बैल प्रथम विश्व युद्ध (१९१४-१९१८) में मेसोपोटेमिया में नियुक्त सेना का हिस्सा थे । ऊँटों से भी तेज चलते हुए इन्होंने कुशलता से संकरी घाटियों और पुलों को पार किया, प्रतिकूल मौसम के अभ्यस्त होकर और कम आहार पाकर भी लड़ कर इन्होंने सबको आश्चर्य चकित कर दिया ।

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