सर्व देव मयी
सब देवताओं का निवास – गाय
गाय के शरीर का प्रत्येक अणु ३३ करोड़ देवताओं का स्थान हैं । गाय के अंगो में सभी १४ रहस्यमय संसार रहते हैं ।
- ब्रह्मा और विष्णु गाय के दो सींगो पर
- सभी पवित्र स्रोत और वेदव्यास सींगों के छोर पर
- भगवान शंकर मध्य मस्तक पर
- पार्वती मस्तक के किनारे पर
- कार्तिकेय नाक पर, कंबल और अश्वतर देव नथुनों पर
- कानों पर अश्विनीकुमार द्वय
- आंखो में सूर्य और चंद्र
- दांतों में वायु और जिह्वा पर वरुण
- गाय के स्वर में सरस्वती
- गलावलंब पर रक्षकगण
- साध्य देव हृदय में
- जांघो में धर्म
- खुरों की फांक में गंधर्व, कोरों पर पन्नाग, बगलों में अप्सरायें
- पीठ पर ११ रुद्र और यम, घाटी में अष्ट वसु
- नाभि संधि मध्य पितृदेव, पेट के क्षेत्र में १२ आदित्य
- पूंछ पर सोम, केशों पर सूर्यकिरणें, मूत्र में गंगा, लक्ष्मी-यमुना गोबर में
- दूध में सरस्वती, दही में नर्मदा, घृत में अग्नि
- ३३ करोड़ देव केशों में
- पेट में पृथ्वी, स्तनों में सागर, पूरे शरीर में कामधेनु
- भाँहों कि जड़ में त्रिगुण, केशों के कूपों में ऋषिगण, श्वास में सब पवित्र झीलें
- ओष्ठों पर चंडिका, त्वचा पर प्रजापति ब्रह्मा
- नथुनों पर सुगंधित पुष्प
- कांख में साध्यदेव
- मुख पर वेदों के ६ भाग, चरणों में चार वेद, खुरों के ऊपर यम, कुबेर और गरुड़ दक्षिण में, यक्ष वाम भाग पार्श्व में, अंदर गंधर्व
- पांवों के अग्र में खेचर, आंतो में नारायण, अस्थियों में पर्वत, चरणों में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, ‘हुँ’ की ध्वनि में चारों वेद



