छठा ज्ञान
गाय का छठा ज्ञान
गाय का छठा ज्ञान तीव्र होता है । पौराणिक कथाओं में तो गाय के बोलने का उल्लेख हैं । वह किसी आसन्न दुर्घटना की चेतावनी अपने स्वामी को देकर उसके बचने में सहायक होती थी । तब विधाता ने गाय को मूक कर दिया ताकि विधि के विधान में परिवर्तन ना हो ।
गाय लोगों के सुख दुःख में प्रभावित होती है । गायों के आंसू बहाने तथा अपने स्वामी से सहानुभूति में आहार न करने के अनेकों उदाहरण हैं ।
संकट का पूर्व ज्ञान :
- महाराष्ट्र के लातूर में ३० सितंबर, १९९३ के दिन एक विनाशकारी भूकंप आया । उस स्थान पर रहनेवाली देवानी गायें उसके कुछ दिन पहले लोगों को चेतावनी के रूप में विचित्र व्यवहार करने लगीं, जैसे रोना, कूदना । उस चेतावनी को हम समझ नहीं पायें ।
- २००४ की त्सुनामी के पहले भी ऐसी घटनाएँ घटी । तब बरगूर, अंब्लाचेरी और कंगायम प्रजाति की गायों ने भी ऐसा ही विचित्र व्यवहार किया । हम पुनः उस संदेश को समझ नहीं पायें ।


