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	<title>GouGram Yatra(hindi)</title>
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		<title>जनवरी ३१ &#8211; राष्टपति को दिये गये ज्ञापन का मूल पाठ</title>
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		<pubDate>Sun, 31 Jan 2010 12:45:40 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Media@Gougram.org</dc:creator>
				<category><![CDATA[खबर]]></category>

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		<description><![CDATA[महामहिम राष्ट्राध्यक्षा जी
भारत
राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली-1
आदरणीय महोदया,
कामधेनु स्वरूप भारतीय गोधन द्वारा प्रदत्त वनौषधि गुणवत्तायुक्त पंचामृत सदृश पंचगव्यों- गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, गोमय, गोमूत्र में सृष्टि संरक्षक पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति जैसे आधारभूत तत्वों के पोषण एवं शोधन की विलक्षण क्षमता है। यह कामधेनु प्रदूषणमुक्त, प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने वाली वात्सल्यमयी माँ है। आदिकाल से [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>महामहिम राष्ट्राध्यक्षा जी</strong></p>
<p>भारत</p>
<p>राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली-1</p>
<p><strong>आदरणीय महोदया,</strong></p>
<p>कामधेनु स्वरूप भारतीय गोधन द्वारा प्रदत्त वनौषधि गुणवत्तायुक्त पंचामृत सदृश पंचगव्यों- गोदुग्ध, गोदधि, गोघृत, गोमय, गोमूत्र में सृष्टि संरक्षक पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति जैसे आधारभूत तत्वों के पोषण एवं शोधन की विलक्षण क्षमता है। यह कामधेनु प्रदूषणमुक्त, प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने वाली वात्सल्यमयी माँ है। आदिकाल से ही हमारी प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण आध्यात्म प्रधान संस्कृति और समृद्धि का आधार रही है। उसके संरक्षण और संवर्धन की समुचित व्यवस्था करना आज भी हमारा प्राथमिक दायित्व है।</p>
<p>इसी दायित्व बोध को जगाने का राष्ट्रव्यापी अभियान विश्वमंगल गोग्राम यात्रा के माध्यम से हमारे पूज्य संत समाज के द्वारा इस वर्ष विजयादशमी से मकर संक्रांति तक संचालित किया गया। देश के लाखों दूरस्थ पहाड़ी वनांचलीय गावों, कस्बों, नगरों और वस्तियों में हजारों उपयात्राओं सहित प्रमुख यात्रा आत्मविभोर कर देने वाली राष्ट्रीय एकात्मता की परिचायक का उत्साहवर्धक भावभरा स्वागत अभिनन्दन किया गया।</p>
<p>करोड़ों भाई बहिनों ने रासायनिक उत्पादों का परित्याग कर पंचगव्य गोउत्पादों, जैविक खाद्यानों का ही प्रयोग करने का संकल्प लेकर (1)- भारतीय गोवंश को राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने, (2)- गोहत्या को तुरन्त प्रतिबंधित करने हेतु केंद्रीय कानून बनाने तथा उसका दृढ़ता से परिपालन कराने, (3)- गोवंश के संरक्षण-संवर्धन की समुचित व्यवस्था कराने,  4)- बैल चालित संयंत्रों से जल बचत जैविक खेती, प्राकृतिक  खेती संयंत्रोंa से विकेंद्रित ग्रामस्तर पर ईंधन, बिजली, गोबर गैस की प्राप्ति एवं पंचगव्य उत्पादनों के प्रचलन को बढ़ावा देकर घर-घर में पंचगव्य औषधियों एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से गांवों को स्वरोजगारयुक्त, स्वस्थ सम्पन्न स्वावलंबी बनाने, (5)- गोचारण एवं चारे की सुलभता हेतु वानिकी, वनौषधि, गोचर, चरागाहों का विकास कर पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त कराने आदि महत्वपू्र्ण बिंदुओं के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह जनभावना से अभिप्रेत ज्ञापन अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व रखता है।</p>
<p>हमारा विश्वास है कि इसकी प्रभावी क्रियान्विति से पर्यावरण को शुद्धि, वैश्विक तापवृद्धि के सर्वनाशकारी संकट से मुक्ति, गोधन की अभिवृद्धि और गाँवों की समृद्धि पुनः स्थापित कर भारत विश्व पटल पर पुनः अपना गरिमामय स्थान प्राप्त कर सकेगा।</p>
<p><strong>(1.) गाय को राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाए।</strong></p>
<p>राष्ट्रीय चिन्ह (अशोक चक्र), तीन मुँह का शेर, जो अहिंसक संस्कृति का प्रतीक है, धर्म चक्र नीति न्याय से आगे बढ़ने का प्रतीक है, घोड़ा विश्वसनीयता का तथा बैल भारत की कृषि संस्कृति का प्रतीक है। इस राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने वाले पर मुकदमा चलना है। बैल की हत्या राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान है। राष्ट्र ध्वज (तिरंगा), राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय पशु (सिंह), राष्ट्रीय पक्षी (मोर), राष्ट्रीय जलजीव (डाल्फिन), के समान ही गाय को राष्ट्रीय सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया जाए।</p>
<p>जैन दर्शन के संस्थापक भगवान ऋषभदेव का पहचान चिन्ह बैल, भगवान शंकर का वाहन नंदी, गोपाल कृष्ण की प्यारी गाय तथा शैलपुत्री महागौरी के वाहन, गाय के कटने से हमारी धार्मिक आस्थाएँ आहत होती हैं। (धार्मिक-मौलिक अधिकारों का हनन)।</p>
<p><strong>(2)- भारतीय नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के हेतु एक अलग से गोसंवर्धन मंत्रालय गो सेवा आयोग गठित किया जाए।</strong></p>
<p>गोवंश के विकास के लिए भारतीय नस्ल के सांडों का संरक्षण, संवर्धन एवं बैलों की उपयोगिता सुनिश्चित करते हुए इनका भी संरक्षण, संवर्धन किया जाए, बैल आधारित कृषि को प्रोत्साहन, गायों के कृत्रिम गर्भाधान को बंद करना, गीर, साहीवाल, थारपारकर, ओंगोल, काँकरेज आदि की विदेशों में 1 से लेकर 2 – 2.5 करोड़ रुपए तक कीमत है। जबकि हमारी सभी प्रांतीय नस्लें असुरक्षित स्थिति में आ गयी है। वेचूर, आलमबादी, बारगुर, कांगायाम बिंजारपुरी सैकड़ों में भी नहीं बची हैं।</p>
<p>गोवंश की संख्या में गिरावट- 9.5%(1992 के बाद)</p>
<p>6.89%(1997 के बाद)</p>
<p>संकरित गोवंश –                      2.46 करोड़</p>
<p>देशी गोवंश संख्या –                  16.04 करोड़</p>
<p>गोवंश का दूध में योगदान &#8211;           40%</p>
<p>संकरित गोवंश का योगदान &#8211;          18%</p>
<p>देशी गोवंश का योगदान &#8211;              22%</p>
<p>संकरित गोवंश में रोग &#8211;                 5.7%</p>
<p>जॉन्स डिसीज         -                0.4%</p>
<p>ब्रूसोलिसीस         –                 12.4%</p>
<p>आईबीआर         -                  43.2%</p>
<p>कैंपियो बैक्टिरियोसिस–                  17.1%</p>
<p>स्वस्थ संकरित गोवंश                   21.2%</p>
<p>पशुधन का कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान – 6.01%</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर पशुधन विकास के लिए प्रावधान-0.11%</p>
<p>पशुधन का कृषि में योगदान- 27.2%</p>
<p>बजट प्रावधान – 11.7%</p>
<p>जबकि एड्स से मृत्यु- 1500 प्रतिवर्ष बजट 550 करोड़</p>
<p>क्षय रोग से मृत्यु- 3,50,000.0 (एड्स से 200 गुना ज्यादा)</p>
<p>बजट – 186 करोड़ मात्र</p>
<p>बर्ड फ्लू से मृत्यु – नहीं</p>
<p>प्रावधान – 160.0 करोड़</p>
<p>संकरित गाय – अपने जीवन काल में 2-3 बछड़े-बछड़ी देती है।</p>
<p>देशी लगभग -14</p>
<p>संकरित दूध – 2 पीढ़ी तक</p>
<p>देशी – असीमित लगातार पीढ़ी दर पीढ़ी</p>
<p>वसा (फैट्स) देशी में 4% से ज्यादा, संकरित में 3% से कम</p>
<p>प्रोटीन संकरित में- ए1 (हृदय रोग, कैंसर रोग आटिज्म रोगों का कारण)</p>
<p>देशी में–ए2 (रोगों को आने से रोकता है)</p>
<p>गोवंश पालन संरक्षण से</p>
<p>महिलाओं को रोजगार -69%</p>
<p>कुल जनता को 86 लाख</p>
<p>परोक्ष &#8211; 76 लाख</p>
<p>राष्ट्रीय गोवंश आयोग (2001-02) के अनुसार</p>
<p>8.0 करोड़ रोजगार जैविक कृषि एवं गोपालन से संभव है।</p>
<p>मिथेन भारतीय गोवंश से 100-150 लीटर प्रतिदिन</p>
<p>विदेशी गोवंश से 400 लीटर प्रतिदिन</p>
<p>भारतीय गोवंश के पंचगव्य(गोबर, गोमूत्र, गोदुग्ध, दही, घृत और छाछ) में  विशेष</p>
<p>गुण पाए गए हैं।</p>
<p>गोमूत्र अर्क पर भारत सरकार ने गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के साथ तीन</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय पेटेंट प्राप्त किए हैं।</p>
<p>गोमूत्र अर्क औषधि की उपलब्धता बढ़ाने वाला, (Bio-Enhancer) रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ाने वाला, (Immuno-Modulator) एवं कर्क रोग रोधी (Anti Cancer) विषाणु नाशक (Anti-Viral), कीटाणु नाशक Anti Bacterial), फफूँद नाशक Anti-Fungal) पाया गया है। अन्य बहुत से गुणधर्म आयुर्वेद में वर्णित हैं।</p>
<p>गोमूत्र कीटनियंत्रक (फसल रक्षक) को भी अंतरराष्ट्रीय पेटेंट ((US Pat. No.7297659) प्राप्त हुआ है, जिसमें फसलों की वृद्धि से लेकर गुणवत्ता संवर्धन रोग प्रतिकार क्षमता बढ़ाना एवं फफूँद नाशक गुणधर्म बड़े प्रमाण में पाए गए।</p>
<p>इसके उपयोग से  कीटनाशकों (Pesticides) के प्रयोग को बड़े प्रमाण में रोका जा सकता है।</p>
<p><strong>(3). गोवंश हत्याबंदी कानून का निर्माण कर उस शक्ति से पूरे देश में लागू किया जाए। मांस निर्यात को बंद कर भारत के समस्त कत्लखानों को प्रतिबंधित किया जाए।</strong></p>
<p>भारत में प्रतिवर्ष लगभग 2.5 करोड़ गोवंश (गोधन) का कत्ल होता है एवं 45-50 लाख की निकासी बांग्लादेश को जाती है। मुगलकाल में गोवंश हत्या पर प्रतिबंध था, लोकतंत्र में क्यों नहीं हो सकता ?</p>
<p><strong>(4).भारत के अन्नदाता किसानों का आत्महत्या का मार्ग छोड़कर  आत्मसम्मान से जीनेवाला जीवन बने।</strong></p>
<p>रासायनिक खाद, कीटनाशकों को प्रतिबंधित करते हुए गो आधारित जैविक कृषि को प्रतिष्ठित करना, ग्राम व कृषि आधारित ग्रामोद्योग केंद्र स्थापित करना।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में किसानों की आत्महत्या लगभग दो लाख पार कर चुकी है। कीटनाशकों के छिड़कने के दुष्प्रभाव से लगभग 2,35,000 किसान या अन्य व्यक्ति मृत्यु मुख में जा रहे हैं।</p>
<p>रासायनिक खाद निर्माण एवं उपयोग से नाइट्रस आक्साइड द्वारा 6 प्रतिशत तक प्रदूषण बढ़ा है। आजकल भूमंडलीय ताप (ग्लोबल वार्मिंग) से विश्व ग्रस्त है। विभिन्न विषैली वायु ( Green House Gases) का प्रभाव बढ़ा है।</p>
<p>रासायनिक खाद पर अनुदान लगभग 1.0 लाख करोड़ रुपए!</p>
<p>कीटनाशकों पर अनुदान – 33700.0 करोड़ रुपए!</p>
<p>10वीं पंचवार्षिक योजना में कीटनाशकों पर अनुदान का प्रावधान  1,68,500.00 करोड़ रुपए!</p>
<p>पहले कृषक का खर्च खेती पर 7.0% था, अब 72.0% हो गया है।</p>
<p>देश की 10-15% भूमि बंजर होने की स्थिति में आ गयी है। भूमिगत जलस्तर बहुत घट गया है।</p>
<p>मनुष्य, पशु-पक्षी, प्राणी, वनस्पति सभी पर रोगों का आक्रमण बहुत बढ़ गया है। मधुमेह रक्तचाप किडनी के रोग, हृदय रोग, कफ, खाँसी, दमा, एलर्जी, कैंसर, आदि कई रोग घर-घर तक पहुँच गए हैं।</p>
<p>2002-03 से गेहूँ का उत्पादन 18.6% घट गया है। यही अन्य फसलों दालें, तिलहन, गन्ना आदि में हो रहा है।</p>
<p>कृषि भूमि को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) हेतु बिल्कुल भी अधिगृहीत न किया जाए।</p>
<p>विशेष कृषि-क्षेत्र विकसित किए जाएँ, जिनमें खाद्य-प्रसंस्करण, शीत भण्डारण</p>
<p>(Cold Storage) आदि की सुविधा हो।</p>
<p><strong>(5). कामधेनु विश्वविद्यालय की स्थापना प्रत्येक राज्य में हो।</strong></p>
<p>गोवंश की उपयोगिता, नस्ल संरक्षण, संवर्धन, जैविक कृषि, पंचगव्य, आयुर्वेद सहित</p>
<p>अन्य उत्पाद आदि   सभी नियमित पाठ्क्रम में शामिल किए जाएं।</p>
<p>गोवंश के विकास, संरक्षण, संवर्धन का अर्थ है विकेंद्रित अर्थव्यवस्था को पुनःस्थापित किया जाय। शाश्वत  मंगल विकास का मार्ग प्रशस्त हो।</p>
<p>संपूर्ण वातावरण (जल, वायु, भूमि) प्रदूषण मुक्त हों।</p>
<p>अतः हमें विश्वास है कि आप हमारी सभी प्रार्थनाओं पर गंभीरता से ध्यान देते</p>
<p>हुए राष्ट्रहित में त्वरित निर्णय करेंगी।</p>
<p>सधन्यवाद,</p>
<p>विनीत</p>
<p><strong>(डा. एच.आर. नागेंद्र)</strong></p>
<p>कार्याध्यक्ष</p>
<p>विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा समिति</p>
<p><strong>३१ जनवरी २०१०, नई दिल्ली</strong></p>
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		<title>जनवरी ३१ &#8211; राद्गट्रपति को ८ करोड़ हस्ताक्षर समर्पित</title>
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		<pubDate>Sun, 31 Jan 2010 12:39:04 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Media@Gougram.org</dc:creator>
				<category><![CDATA[खबर]]></category>

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		<description><![CDATA[नई दिल्ली, जनवरी ३१, २०१०ः गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने, गाय को देच्च की सांस्कृतिक धरोहर घोद्गिात करने, भारतीय नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अलग से गोसंवर्धन मंत्रालय तथा गो सेवा आयोग गठित किए जाने तथा प्रत्येक राज्य में कामधेनु विच्च्वविद्यालयों की स्थापना किए जाने की मांगों को लेकर आज विच्च्व मंगल गो-ग्राम [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली, जनवरी ३१, २०१०ः </strong>गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने, गाय को देच्च की सांस्कृतिक धरोहर घोद्गिात करने, भारतीय नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अलग से गोसंवर्धन मंत्रालय तथा गो सेवा आयोग गठित किए जाने तथा प्रत्येक राज्य में कामधेनु विच्च्वविद्यालयों की स्थापना किए जाने की मांगों को लेकर आज विच्च्व मंगल गो-ग्राम यात्रा के एक प्रतिनिधिमंडल ने च्चंकराचार्य स्वामी राघवेच्च्वर भारती के नेतृत्व में देच्चभर से एकत्र ८ करोड  ३५ लाख ६७ हजार और ४१ हस्ताक्षरों के संग्रह को नई दिल्ली में महामहिम राद्गट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को सौंपा। साथ ही इस संबंध में उन्हें एक ज्ञापन भी दिया गया जिसमें निवेदन किया कि देच्चवासियों की आस्था की प्रतीक गोमाता तथा सम्पूर्ण गोवंच्च की हत्या पर प्रतिबंध लगे। प्रतिनिधिमंडल में योगगुरु स्वामी रामदेव भी उपस्थित थे। उन्होंने महामहिम राद्गट्रपति से गोआधारित स्वास्थ्य नीति बनाने के विद्गाय में आग्रह किया तथा गोमूत्र तथा गोमय से तैयार औद्गाधियों के बारे में जानकारी दी।</p>
<p>ज्ञापन में कहा गया है कि कामधेनु स्वरूप भारतीय गोधन द्वारा प्रदत्त वनौद्गाधि गुणवत्तायुक्त पंचामृत सदृच्च पंचगव्यों- गोदुग्ध, गोघृत, गोमय, गोमूत्र में सृद्गिट संरक्षक पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, वनस्पति जैसे आधारभूत तत्वों के पोद्गाण एवं द्राोधन की विलक्षण क्षमता है। यह कामधेनु प्रदूद्गाणमुक्त प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने वाली वात्सल्यमयी मां है। आदिकाल से ही हमारी प्राकृतिक संपदाओं से परिपूर्ण अध्यात्म प्रधान संस्कृति और समृद्धि का आधार रही है। इसके संरक्षण और संवर्धन की समुचित व्यवस्था करना आज भी हमारा प्राथमिक दायित्व है।</p>
<p>राद्गट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरतापूर्वक एक घण्टे तक सुना और अपनी ओर से आवच्च्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।</p>
<p>राद्गट्रपति महोदया को ज्ञापन देने से पूर्व नई दिल्ली स्थित रामलीला मैदान में हस्ताक्षर समर्पण के लिए समिति द्वारा एक विच्चाल जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें देच्चभर से आए हुए संत-महात्माओं सहित राजधानी दिल्ली के हजारों गोभक्तों ने भाग लिया तथा गोमाता की रक्षा करने का अपना संकल्प दोहराया। सभा का द्राुभारम्भ यात्रा के प्रेरणास्रोत गोकर्ण पीठ के द्रांकराचार्य स्वामी राघवेच्च्वर भारती द्वारा ध्वजारोहण तथा गोमाता का पूजन कर किया गया। तत्पच्च्चात्‌ संतों तथा गोसंरक्षण के विद्वानों ने गोरक्षा तथा सम्पूर्ण गोवंच्च के उपयोग पर गोभक्तों का मार्गदर्च्चन किया।</p>
<p>रा.स्व.संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कुप्‌.सी. सुदर्च्चन ने कहा कि संविधान में गोरक्षा का उल्लेख होने के बावजूद भी आज गोहत्या तेजी से हो रही है। उन्होंने गोमाता को विकास का आधार बताते हुए कहा कि गाय का दूध बहुपयोगी होने के साथ-साथ उसका गोबर तथा मूत्र भी उपयोगी हैं। उन्होंने च्चिच्चु के लिए मां के दूध के पश्चात्‌ गाय के दूध को सर्वोत्तम बताया। इसके अलावा उन्होंने गोमूत्र तथा गोबर से बनने वाले अनेक उत्पादों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।</p>
<p>स्वामी राघवेच्च्वर भारती ने गोमाता को भारत और किसान की जीवनरेखा कहते हुए देच्च के राजनेताओं और मंत्रियों से आह्‌वान किया कि वे नेता तथा मंत्री के दायित्व का निर्वहन करने से पहले अपने पुत्र धर्म का पालन करें तथा गोरक्षा के हित में कार्य करें।</p>
<p>विच्च्व हिन्दू परिद्गाद्‌ के अंतरराद्गट्रीय अध्यक्ष श्री अच्चोक सिंहल ने कहा कि १९५२ में भी गोरक्षा के समर्थन में तत्कालीन राद्गट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद को १.७५ करोड़ हस्ताक्षर सौंपे गये थे। आज २०१० में भी हम गोरक्षा के लिए संघर्द्गा कर रहे हैं। लेकिन गोरक्षा का कोई कानून नहीं बन सका। ऐसा न हो कि हम हस्ताक्षर कराकर देते रहें और सरकार इस बारे में कुछ न सोचे।</p>
<p>सभा को पेजावर मठ के स्वामी श्री विच्च्वेद्गातीर्थ, स्वामी परमात्मानंद, दीदी मां साध्वी ऋतंभरा, श्री केसरी चंद मेहता, बौद्ध संत स्वामी राहुल बौधि तथा मुफि्‌त सुमम कासमी आदि ने भी संबोधित किया तथा श्री श्री रविच्चंकर, माता अमृतानंदमयी व डा प्रणव पंडया के संदेच्च उनके प्रतिनिधियों ने पढ कर सुनाये।</p>
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		</item>
		<item>
		<title>जनवरी १७ &#8211; १०८ दिवसीय विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा का नागपुर में समापन, ग्रामोदय से राष्ट्रोदय का प्रतीक है गोमाताः बाबा रामदेव</title>
		<link>http://hindi.gougram.org/?p=1061</link>
		<comments>http://hindi.gougram.org/?p=1061#comments</comments>
		<pubDate>Sun, 17 Jan 2010 15:42:30 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Media@Gougram.org</dc:creator>
				<category><![CDATA[खबर]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://hindi.gougram.org/?p=1061</guid>
		<description><![CDATA[नागपुर, १७ जनवरी। गोरक्षा के लिए १०८ दिन तक सम्पूर्ण देश को झकझोरने के बाद विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा आज यहां सम्पन्न हो गयी। रेशिम बाग मैदान में आयोजित विशाल समापन सभा को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्व योग गुरू बाबा रामदेव ने कहा कि गोमाता आत्मउपचार और आत्मसाक्षात्कार का आधार है और यह ग्रामोदय [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नागपुर, १७ जनवरी। </strong>गोरक्षा के लिए १०८ दिन तक सम्पूर्ण देश को झकझोरने के बाद विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा आज यहां सम्पन्न हो गयी। रेशिम बाग मैदान में आयोजित विशाल समापन सभा को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्व योग गुरू बाबा रामदेव ने कहा कि गोमाता आत्मउपचार और आत्मसाक्षात्कार का आधार है और यह ग्रामोदय से राष्ट्रोदय का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि गाय कोई सांप्रदायिक प्राणी नहीं है, यह बिना किसी भेदभाव के सभी का पालन करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आज गाय नहीं बची तो पूरी दुनिया का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।</p>
<p>बाबा रामदेव ने उपस्थित जनसमूह का आहवान करते हुए कहा कि सभी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से गोसेवा करें। उन्होंने कहा कि प्रातःकाल गोमूत्र का सेवन अनेक बीमारियों का शमन करता है और कब्जी होने की संभावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि गाय अगर दूध न भी दे तो भी सिर्फ गोमूत्र और गोबर से पर्याप्त आय हो सकती है। उन्होंने सात रूपये प्रति लीटर के भाव से गोमूत्र खरीदने का भरोसा भी दिलाया।<br />
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने कहा कि एक समय था जब गाय और गांव की बात को पिछड ी बात माना जाता था। लेकिन आज आधुनिक युग में यही मुखय चिंतन की बात मानी जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शहर जितना बड ा बनेगा, उतना ही बेखबर भी बनेगा। गांव में मनुष्य मनुष्य को पहचानता है, अतः वह स्वतंत्रता, समरसता और सुख का अनुभव करता है, और नियंत्रणविहीन व्यवस्था होते हुए भी अनुद्गाासित समाज होता है। उन्होंने गोग्राम आधारित जीवन को विकेंद्रित और प्रकृति के समीप का युगानुकुल तरीका बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा का उद्यापन है। केवल नारों से काम चलने वाला नहीं है। उन्होंने देशवासियों को आहवान किया कि वे गाय को जीवन में लाने के लिए दो चार कदम आगे बढ ाएं।</p>
<p>विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के समापन समारोह के अवसर पर रेशिम बाग मैदान में मानों पूरा शहर उमड़ पड ा। पूरा मैदान खचाखच भरा हुआ था। योग गुरू बाबा रामदेव के अलावा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के अलावा करवीर पीठ के शंकराचार्य श्री नृसिंह भारती सरस्वती, आचार्य महासभा के अध्यक्ष स्वामी दयानंद सरस्वती, गोकर्ण पीठाधीश्वर शंकराचार्य श्री राघवेश्वर भारती स्वामीजी, जैन मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, बौद्व संत भंते ज्ञान जगत महाराज, नवबौद्व संत भदंत राहुल बौधि, मौलाना बशीर कादरी आदि ने गोरक्षा के प्रति अपना संकल्प व्यक्त किया।</p>
<p>समापन कार्यक्रम से पूर्व यात्रा समिति के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डा एच आर नागेन्द्र,, राष्ट्रीय सचिव श्री शंकरलाल एवं अन्य पदाधिकारियों ने दीक्षा भूमि जाकर भारत रत्न डा भीमराव अम्बेडकर को श्रद्वांजलि अर्पित की।<br />
यात्रा के राष्ट्रीय सचिव श्री शंकरलाल ने बताया कि १०८ दिन चली विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा ने देश का अनवरत भ्रमण किया और दस हजार उपयात्राओं ने पूरे देश को मथ डाला। गांव-गांव, गली-गली, नगर-नगर, डगर-डगर यात्राओं का अभूतपूर्व स्वागत हुआ। हिन्दू ही नहीं ईसाई और मुस्लिम समाज के लोगों ने भी इसमें बढ -चढ कर भाग लिया। देशभर में हजारों सामाजिक संगठन इसमें सहभागी हुए।</p>
<p>उन्होंने बताया कि विश्व के आधुनिक इतिहास में सबसे बडे़ जनमत संग्रह के रूप में यात्रा का हस्ताक्षर अभियान स्थापित हुआ है। करोड ों लोगों ने अपने हस्ताक्षर द्वारा इस अभियान के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। यह वह संखया है जो आज से पहले किसी भी अभियान के समर्थन में नहीं जुटी।</p>
<p>शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, रामानंदाचार्य, महामंडलेश्वर, अखाडे, जैन मुनि, बौद्व भिक्षु, नामधरी संत, वाल्मिकी संत, रामसनेही सम्प्रदाय, गायत्री परिवार, बह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, पातंजली योगपीठ, आर्ट ऑफ लिविंग, चिन्मय मिशन जैसे प्रतिनिधि संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी यात्रा को यशस्वी बनाने में महत्वपूर्ण रही।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यात्रा ने न केवल भारत की आस्था को झकझोरा है बल्कि देशभर में स्वावलंबन के बीज भी बोये हैं। निराश हृदयों में आशा का संचार किया है तो युवा शक्ति को आत्मविश्वास का अग्निमंत्र भी दिया है। उन्होंने कहा कि विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा स्वतंत्र भारत का सबसे बड ा और प्रभावी आंदोलन है और यह एक मौनक्रांति का सूत्रपात है।</p>
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		<title>जनवरी १६ &#8211; ऋच्चि के समतुल्य है गोमाता &#8211; गोविन्द गिरि</title>
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		<pubDate>Sun, 17 Jan 2010 02:27:34 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[अकोला, १६ जनवरी। विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पुणे के महामंडलेद्गवर श्री गोविन्द गिरि ने कहा कि गोमाता की कीमत और एक ऋच्चि की कीमत एक समान है। उन्होंने कहा कि च्यवन ऋच्चि ने करोडों स्वर्ण मुद्राओं को भी अपने तुल्य न मानकर एक गाय को अपने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>अकोला, १६ जनवरी। </strong>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पुणे के महामंडलेद्गवर श्री गोविन्द गिरि ने कहा कि गोमाता की कीमत और एक ऋच्चि की कीमत एक समान है। उन्होंने कहा कि च्यवन ऋच्चि ने करोडों स्वर्ण मुद्राओं को भी अपने तुल्य न मानकर एक गाय को अपने बराबर माना।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ऋच्चि और गोपाल के भारत देद्गा में घी पूर्णतया द्याुद्ध है या नहीं यह कहना मुद्गिकल है। घी में ६० प्रतिद्गात तक गाय और सुअर की वसा होती है।</p>
<p>श्री गिरि ने कहा कि इस भूमि से पुत्र रूप में नाता जोडने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं के निर्माण की आवद्गयकता है। उसी से गाय बचेगी और समाज बचेगा।</p>
<p>गोकर्ण पीठ के जगदगुरू द्यांकराचार्य श्री राघवेद्गवर भारती स्वामी ने कहा कि भारत की सुरक्षा के लिए तीन प्रकार की सेनाऐं है। भारत में हो रहे भीतरी आक्रमण को रोकने के लिए चौथी सेना अर्थात गोसेना की आवद्गयकता है।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा द्यानिवार को अकोला पहुंची जहां जोरदार स्वागत किया गया और भव्य द्याोभायात्रा निकाली गयी। राजराजेद्गवरी मंदिर से द्याोभायात्रा आरंभ हुई जिसमें श्री विठ्‌ठल रघुमाई मंदिर के भक्त, आदर्द्गा गोसेवा प्रकल्प , श्री गजानान महाराज मंदिर, गायत्री परिवार और पतंजली योग समिति आदि के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।</p>
<p>जिला संयोजक श्री हेमन्त थोरात ने बताय कि अकोला जिले में दो उपयात्रायें निकाली गयी जिनके माध्यम से ७१५ गांवो में संपर्क किया गया। लोगों से गोहत्या बंदी कानून के लिए चार लाख हस्ताक्षर संग्रहीत किये गये। खास बात यह रही कि तेलारा और आकोट गांव में द्यात प्रतिद्गात हस्ताक्षर किये गये। संग्रहीत हस्ताक्षर जगदगुरू द्यांकराचार्य  को सौंपे गये। वहीं ३१ हजार गोरक्षकों की सूची भी सौंपी गयी।</p>
<p>क्रिकेट क्लब मैदान में आयोजित सभा को यात्रा के राच्च्ट्रीय सचिव श्री द्यांकरलाल, श्री ज्ञानेद्गवर महाराज, श्री संजय महाराज, श्री बड़ातात्या कराडकर महाराज आदि ने संबोधित किया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान गोभक्त श्री आत्माराम मोतीराम इंगले को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।</p>
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		<title>जनवरी १५ &#8211; गोमाता हमारे जीवन में लौट आये- श्री राघवेद्गवर भारती</title>
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		<pubDate>Sat, 16 Jan 2010 02:40:21 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[मंगरूलनाथ, १५ जनवरी। सतयुग में जंगल-जंगल में, त्रैतायुग में नगर-नगर में, और द्वापरयुग में घर-घर में राक्षस थे और कलयुग में तो मन-मन में राक्षस है, इसी कारण हमने गोमाता को हमारे जीवन से निकाल दिया। गोमाता पुनः हमारे जीवन में लौट आये, तभी हमारा जीवन सुखमय होगा। यह कहना है गोकर्ण पीठ के जगदगुरू [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंगरूलनाथ, १५ जनवरी।</strong> सतयुग में जंगल-जंगल में, त्रैतायुग में नगर-नगर में, और द्वापरयुग में घर-घर में राक्षस थे और कलयुग में तो मन-मन में राक्षस है, इसी कारण हमने गोमाता को हमारे जीवन से निकाल दिया। गोमाता पुनः हमारे जीवन में लौट आये, तभी हमारा जीवन सुखमय होगा। यह कहना है गोकर्ण पीठ के जगदगुरू द्यांकराचार्य श्री राघवेद्गवर भारती महास्वामी का। वे आज विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के मंगरूलनाथ पहुंचने पर आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>सूर्यग्रहण का उल्लेख करते हुए श्री स्वामी ने कहा कि देद्गा को गोहत्या का ग्रहण लगा हुआ है। जानकारी हो कि १५ जनवरी को इस सहस्त्राब्दि का सबसे लंबा सूर्यग्रहण था। उन्होंने कहा कि सूर्यग्रहण का तो मोक्ष हो गया परंतु गोहत्या रूपी कंलक से भारत को मुक्त कराना अभी बाकी है। यह विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा वास्तविक स्वतंत्रता संग्राम है जिसका नारा है वंदे गो मातरम्‌।</p>
<p>श्री भारती ने कहा कि गोमाता माताओं की मां और गुरूओं की गुरू है। गोमाता विद्गव में पवित्रतम्‌ प्राणी है। गोमाता के द्वारा कई दोच्चों का द्यामन होता है। यहां तक कि दोच्चकाल में जन्म लेने वाले बालक को गाय के पेट के नीचे से निकालने पर उसकी कुंडली में गोचर ग्रहों की स्थिति भी बदल जाती है।</p>
<p>केद्गाव गोरक्षण में आयोजित सभा को श्री बाबूराव महाराज लंके, केद्गाव गोरक्षण के अध्यक्ष श्री पूंडकर महाराज, श्री दाभाडे महाराज और श्री खाड़े महाराज आदि ने संबोधित किया। श्री नारायण महाराज द्गिांदे ने उपस्थित हजारों गोभक्तों को गोरक्षा का संकल्प कराया।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के जिला संयोजक श्री विक्रम बावरे ने बताया कि वाद्गाीम जिले में दो उपयात्राओं के माध्यम से ४७५ गांवों में संपर्क किया गया और एक लाख पचास हजार हस्ताक्षर संग्रहीत किये गये जिन्हें कार्यक्रम में श्री द्यांकराचार्य को सौंपा गया।</p>
<p>श्री सुधाकर चौधरी के द्वारा गाय पर बनाई गयी वेब साइट का विमोचन श्री राघवेद्गवर भारती स्वामी ने किया।</p>
<p>द्याुक्र्रवार को विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा मंगरूलनाथ पहुंची जहां ग्रहण की समाप्ति के बाद केद्गाव गोरक्षण में आयोजित सभा के पूर्व गोरथ का भव्य स्वागत किया गया। महिलाओं ने रंगोली बनाकर तथा दीपक जलाकर और सिर पर कलद्गा लेकर गोरथ की अगवानी की।</p>
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		<title>जनवरी १४ &#8211; विद्गव को सही दिद्गाा देने का दायित्व भारत का -भय्याजी जोद्गाी</title>
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		<pubDate>Fri, 15 Jan 2010 02:21:52 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[यवतमाल, १४ जनवरी। आज संपूर्ण विद्गव भोगवाद से त्रस्त है। विद्गव के सभी वैज्ञानिक चिंतित है। प्रकृति की रक्षा की दिद्गाा में मार्गदर्द्गान केवल भारत ही कर सकता है, ऐसा दुनिया के लोग मान रहे है, लेकिन हमें यह दायित्व स्वीकार करने की आवद्गयकता है। यह विचार राच्च्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेद्गा जोद्गाी [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>यवतमाल, १४ जनवरी।</strong> आज संपूर्ण विद्गव भोगवाद से त्रस्त है। विद्गव के सभी वैज्ञानिक चिंतित है। प्रकृति की रक्षा की दिद्गाा में मार्गदर्द्गान केवल भारत ही कर सकता है, ऐसा दुनिया के लोग मान रहे है, लेकिन हमें यह दायित्व स्वीकार करने की आवद्गयकता है। यह विचार राच्च्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेद्गा जोद्गाी ने एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए रखे। मौका था विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा का महाराच्च्ट्र के यवतमाल नगर में आगमन।</p>
<p>श्री जोद्गाी ने कहा कि पहले किसान स्वावलंबी था। लेकिन हरित क्रान्ति के फलस्वरूप वह बीज, खाद और कीटनाद्गाक के लिए उद्योगों पर निर्भर हो गया है। भूमि को पुनः सुजलाम्‌ और सुफलाम्‌ बनाना है तो गो आधारित कृच्चि को बढावा देना होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गांव का प्रत्येक घर गोपालन व गोरक्षा का केन्द्र बनना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति गोभक्त और गोरक्षक बनें। गोभक्त का अर्थ केवल गाय की पूजा करने वाला ही नहीं बल्कि पंचगव्य से बने उत्पादों का उपयोग करने वाला है जिससे गोमाता का महत्व सिद्ध हो सके। इसी प्रकार गोमाता पर किसी प्रकार की हिंसा न करने वाला और न होने देने वाला, गोरक्षक है।</p>
<p>गोकर्ण पीठ के जगदगुरू द्यांकराचार्य श्री राघवेद्गवर भारती स्वामी ने गोभक्तों का आहवान करते हुए कहा कि यह विचार करो कि हम गोमाता के लिए जो कर रहे है वह पर्याप्त है क्या ? यदि नही ंता,े जागो, जुड़ो और जोड ों। यदि अब भी गोमाता की रक्षा नहीं हो पायी तो फिर गोमाता की रक्षा करने की आवद्गयकता ही नहीं रहेगी, क्योंकि गाय ही नहीं बचेगी। अतः यह अंतिम यात्रा है, आखिरी मौका है।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के यवतमाल पहुंचने पर यात्रा के स्वागत में भव्य द्याोभायात्रा का आयोजन किया गया। युवाओं ने जोरदार आतीद्गाबाजी की और गोमाता के जयकारें लगायें। नगरवासियों ने जोरदार पुच्च्पवर्च्चा की।</p>
<p>आजाद मैदान में आयोजित धर्मसभा की अध्यक्षता महंत श्री रामलखन दास महाराज ने की और उपस्थित गोभक्तों को गोरक्षा का संकल्प कराया। सभा को श्री भागवताचार्य गणेद्गा द्याास्त्री, श्री बाबुराव लंके महाराज, श्री दत्ताभाऊ कुलकर्णी और यात्रा के राच्च्ट्रीय सचिव श्री द्यांकरलाल आदि ने भी संबोधित किया।</p>
<p>कार्यक्रम की द्याुरूआत एक भव्य द्याोभायात्रा से हुई जिसने पूरे नगर का भ्रमण किया। साथ ही चार दिद्गााओं से चार उपयात्राओं ने नगर में प्रवेद्गा किया जिसमें हजारों की संखया में ग्रामीण नर-नारी द्याामिल थे।  आजाद मैदान में ये सभी उपयात्राऐं एकत्रित हुई और धर्मसभा में परिणत हो गयी।</p>
<p>यात्रा के जिला संयोजक श्री जीवन लढ्‌ढी ने बताया कि यवतमाल जिले में चार उपयात्राओं के माध्यम से तीन सौ गांवों मे संम्पर्क किया गया और दो लाख अस्सी हजार हस्ताक्षरों का संग्रह किया गया। संग्रहीत हस्ताक्षर संतों को सौंपे गये।</p>
<p>इससे पहले विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा वरोड़ा और वणी पहुंची जहां सार्वजनिक सभा का आयोजत किया गया। जिसमें हजारों गोभक्तों ने गोरथ की अगवानी की और गोरक्षा का संकल्प लिया। मार्ग में पड ने वाले गांवों में भी ग्रामवाासी सड क के दोनों ओर खड े होकर पुच्च्पवर्च्चा कर रहे थे।</p>
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		<title>जनवरी १३ &#8211; गाय देवता और मंदिर है गांव &#8211; राघवेद्गवर भारती</title>
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		<pubDate>Thu, 14 Jan 2010 02:13:47 +0000</pubDate>
		<dc:creator>Media@Gougram.org</dc:creator>
				<category><![CDATA[खबर]]></category>

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		<description><![CDATA[चन्द्रपुर, १३ जनवरी। गाय देवता है और ग्राम मंदिर है। यदि देवता को निकाल दिया गया तो मंदिर का क्या होगा ? मंदिर नहीं होगा तो देवता कहां रहेगा ? यह द्याोचनीय विच्चय है। ग्राम, गाय और किसान यह ़ित्रकोण है। इसकी रक्षा से ही भारत का सही दिद्गाा में विकास हो पायेंगा।
श्री भारती ने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>चन्द्रपुर, १३ जनवरी।</strong> गाय देवता है और ग्राम मंदिर है। यदि देवता को निकाल दिया गया तो मंदिर का क्या होगा ? मंदिर नहीं होगा तो देवता कहां रहेगा ? यह द्याोचनीय विच्चय है। ग्राम, गाय और किसान यह ़ित्रकोण है। इसकी रक्षा से ही भारत का सही दिद्गाा में विकास हो पायेंगा।</p>
<p>श्री भारती ने कहा कि गोहत्या में हम भी बराबर के भागीदार है क्योंकि हमारे ही द्वार से गाय कसाईयों के हाथ जा रही है और हम मूकदर्द्गाक बनें हुए है। उन्होंने कहा कि सत्ता स्वतः कुछ नहीं करती, सत्ता से करवाना पड ता है। सरकार बिना दबाव के कुछ नहीं करती, अतः हमें सरकार पर दबाव बनाना होगा। उन्होंने उपस्थित गोभक्तों को गोरक्षा का संकल्प करवाया।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा भंडारा से चलकर पवरी, ब्रह्‌मपुर, तलौधी होते हुए चन्द्रपुर पहुंची जहां यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। चंदाकुलापुरम्‌ क्लब ग्राउंड के मैदान में आयोजित सभा को श्री भगवताचार्य मनीच्च महाराज, स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री किद्गान चठ्‌ठा, डा. सच्चिादानंद मुनगंटीवार, श्री लक्ष्मीकांत पांडे ने संबोधित किया।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के जिला संयोजक श्री विवेक आंबेकर ने बताया कि चन्द्रपुर जिले में तीन उपयात्रायें निकाली गयीं जिसमें १५० गांवों में संपर्क किया गया और तीन लाख पचास हजार हस्ताक्षर संग्रहीत किये गये। संग्रहीत हस्ताक्षर श्री राघवेद्गवर भारती को सौंपे गये।</p>
<p>इससे पूर्व जब यात्रा पवरी, ब्रह्‌मपुर और तलौधी पहुंची तो यात्रा की अगवानी में ग्रामवासियों ने जोरदार पुच्च्पवर्च्चा की और बाजे-गाजे के साथ गोरथ की अगवानी की। आयोजित सभाओं में हजारों गोभक्तों ने गोरक्षा का संकल्प लिया।</p>
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		<title>जनवरी १२ &#8211; गाय के मंगल में ही सबका मंगल &#8211; राघवेद्गवर भारती</title>
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		<pubDate>Wed, 13 Jan 2010 02:04:10 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[भंडारा, १२ जनवरी। गोपाल के इस देद्गा में गोमाता सुरक्षित नहीं है। गोमाता की जन्म से मृत्यु तक एक अप्राकृतिक अमंगल यात्रा हो रही है। यह यात्रा किसान के घर से कसाई के हाथ तक होती है।
विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा, गोमाता की इस अमंगल यात्रा को रोकने के लिए है। गोमाता के नैसर्गिक जीवन से [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>भंडारा, १२ जनवरी।</strong> गोपाल के इस देद्गा में गोमाता सुरक्षित नहीं है। गोमाता की जन्म से मृत्यु तक एक अप्राकृतिक अमंगल यात्रा हो रही है। यह यात्रा किसान के घर से कसाई के हाथ तक होती है।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा, गोमाता की इस अमंगल यात्रा को रोकने के लिए है। गोमाता के नैसर्गिक जीवन से ही हमारा जीवन संभव होगा। यह कहना है गोकर्ण पीठ के जगदगुरू द्यांकराचार्य श्री राघवेद्गवर भारती स्वामी का। वे आज विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के भंडारा आगमन पर आयोजित सभा को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>राच्च्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत का विकास भारतीय तरीके से होना चाहिए। भारत का वास्तविक विकास गाय और गांव से ही संभव है अतः गाय के संरक्षण और संवर्धन की राच्च्ट्रीय स्तर पर योजना बनकर क्रियान्वयन होना चाहिए।</p>
<p>यात्रा के राच्च्ट्रीय सचिव श्री द्यांकरलाल ने कहा कि एक बैल की जोडी गोलाकार पथ में घूमकर एक रोटरी गियर को दो से तीन चक्कर प्रति मिनिट की गति से चलाती है। इस गति को गियर युनिट से लगभग १२५ गुना बढ़ाकर एक द्यााफ्‌ट पर उपलब्ध कराया जा सकता है। इस ऊर्जा का संग्रह करके विविध कार्यों में उपयोग किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बैल की ऊर्जा का उपयोग घूर्णी पद्धति द्वारा चारा काटने की मद्गाीन, आटा चक्की, अनाज सफाई एंव वर्गीकरण यंत्र चलाने में भी किया जा सकता है।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा मंगलवार को रायपुर से निकलकर दूर्ग, राजनंदगांव और देवरी होते हुए विदर्भ प्रांत के भंडारा नगर पहुंची जहां जोरदार पुच्च्पवर्च्चा से अगवानी की गयी। महिलाओं ने पूर्ण कलद्गा लेकर यात्रा की अगवानी की। युवकों ने वाहन रैली निकाली और आतीद्गाबाजी की।</p>
<p>सभा को श्री नारायण महाराज द्गिांदे, श्री सुर्यनाथ नाजी बराही महाराज, श्री रूपचंद नीखाड े महाराज, श्री नेमीचंद दोए, श्री गोवर्धनदास महाराज, श्री विजय कृच्च्ण ब्रह्‌मचारी महाराज आदि ने संबोधित किया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान भंडारा जिले से संग्रहीत दो लाख हस्ताक्षर श्री राघवेद्गवर भारती को सौंपे गये। संतो ंको साक्षी मानकर  उपस्थित गोभक्तों ने गोरक्षा का संकल्प किया और गोमाता की आरती की।</p>
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		<item>
		<title>जनवरी ११ &#8211; पृथ्वी संकट का कारण विज्ञान की ताकत व मनुच्च्य का लोभ &#8211; सुरेद्गा सोनी</title>
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		<pubDate>Tue, 12 Jan 2010 02:33:13 +0000</pubDate>
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				<category><![CDATA[खबर]]></category>

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		<description><![CDATA[रायपुर, ११ जनवरी। विज्ञान की ताकत और मनुच्च्य के लोभ के कारण पृथ्वी पर आज संकट छा गया हैं और दिनों दिन प्रकृति का क्षरण हो रहा है। गो आधारित कृच्चि और ग्राम विकास ही ऐसी स्थिति से बचा सकता है। विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के रायपुर पहुंचने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>रायपुर, ११ जनवरी। </strong>विज्ञान की ताकत और मनुच्च्य के लोभ के कारण पृथ्वी पर आज संकट छा गया हैं और दिनों दिन प्रकृति का क्षरण हो रहा है। गो आधारित कृच्चि और ग्राम विकास ही ऐसी स्थिति से बचा सकता है। विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के रायपुर पहुंचने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए राच्च्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह श्री सुरेद्गा सोनी ने यह कहा।</p>
<p>श्री सोनी ने कहा कि हमारी विचारधारा में परिवर्तन हो गया है। हमने यह मान लिया की यह प्रकृति हमारे लिए ही बनी है, इसका भोग करना हमारा अधिकार है। हम यह भूल गये कि हम भी इसी प्रकृति के एक अंद्गा के रूप में जी रहे है, अगर यह प्रकृति नच्च्ट हुई तो हम भी नहीं बच पाऐंगे।</p>
<p>श्री सोनी ने कहा कि विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा दूसरा स्वतंत्रता संग्राम है। पहले स्वतंत्रता संग्राम में चरखा प्रतीक के रूप में था, इस संग्राम में गाय प्रतीक के रूप में है।</p>
<p>गोकर्ण पीठ के जगदगुरू द्यांकराचार्य श्री राघवेद्गवर भारती स्वामी ने कहा कि गोमूत्र में वो द्याक्ति है जो चमडे से लेकर हड्‌डी तक के सारे दोच्चों का द्यामन कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि एक गाय की हत्या कर दी जाए तो उसके मांस से केवल ८० लोग ही तृप्त हो सकते है, लेकिन गाय अगर जीवित रहेगी तो २६ हजार जनों का भरण-पोच्चण होगा।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा कवर्धा से निकलकर मुंगेली, बिलासपुर, सिमगा होते हुए छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर पहुंची जहां यात्रा की अगवानी में द्याोभायात्रा का आयोजन किया गया। मार्ग में सैकड़ों सामाजिक संगठनों और प्रबुद्धजनों ने पुच्च्पवर्च्चा द्वारा यात्रा का स्वागत किया। राच्च्ट्रीय मुस्लिम मंच ने भी गोरथ पर पुच्च्पवर्च्चा की और गोरक्षा का संकल्प लिया।</p>
<p>विद्गव मंगल गोग्राम यात्रा के बंजारेद्गवर महादेव मंदिर पहुंचने पर छत्तीसगढ  राज्य के मुखयमंत्री डा. रमणसिंह ने आकर गोरथ की पूजा की और यात्रा की अगवानी की।</p>
<p>सप्रे द्यााला मैदान में आयोजित सभा को अमरकंटक के महन्त अनुसूयादास महराज, स्वामी वेदप्रकाद्गा महाराज, सर्वेद्गवरनाथ महाराज और यात्रा के राच्च्ट्रीय सचिव श्री द्यांकरलाल आदि ने संबोधित किया।</p>
<p>हरीद्गा भाई जोद्गाी ने बताया कि छत्तीसगढ  प्रांत में १४२ उपयात्रा निकलीं, जोकि ८५०० गांवों तक गयी और १४००० गांवो तक संपर्क किया गया। इस अभियान में ६५ लाख हस्ताक्षरों का संग्रह किया गया।</p>
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		<title>जनवरी १० &#8211; गोरक्षा का उपक्रम किसान के घर से शुरू होना चाहिए &#8211; स्वामी विशुद्धानंद</title>
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		<pubDate>Mon, 11 Jan 2010 02:42:01 +0000</pubDate>
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		<description><![CDATA[कवर्धा, जनवरी १० : जो वस्तु जहां गुम होती है, वह उसी स्थान पर ढूंढने पर मिलती है । गोरक्षा का उपक्रम किसान के घर बंद हुआ है अतः किसान के घर से ही गोरक्षा का उपक्रम शुरू होना चाहिए । यह वचन विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के मध्यप्रदेश के कवर्धा नगर में पहुंचने [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कवर्धा</strong><strong>, </strong><strong>जनवरी १० :</strong> जो वस्तु जहां गुम होती है, वह उसी स्थान पर ढूंढने पर मिलती है । गोरक्षा का उपक्रम किसान के घर बंद हुआ है अतः किसान के घर से ही गोरक्षा का उपक्रम शुरू होना चाहिए । यह वचन विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के मध्यप्रदेश के कवर्धा नगर में पहुंचने पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए दण्डपाणि विशुद्धानंद सरस्वती ने कहे ।</p>
<p>श्री दण्डपाणी ने कहा कि ऐसा कानून बनना चाहिए जिससे गांवों की गोचर भूमी को भूमाफियाओं से मुक्त कराकर गोमाता के चरने के लिए सुरक्षित किया जा सके । उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्येक गांव में एक, एक गोशाला होनी चाहिए और उस गोशाला के संचालन के लिए गांव का प्रत्येक घर सहयोग करें ।</p>
<p>विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा रविवार को जबलपुर से निकलकर मंडला होते हुए कबीर धाम कवर्धा पहुंची जहां नगरवासियों ने भव्य स्वागत किया । महिलाओं ने पूर्ण कलश लेकार गोरथ की अगवानी की ।</p>
<p>गांधी मैदान में आयोजित सभा को विश्व मंगल गो ग्राम यात्रा के राष्ट्रीय मार्गदर्शक श्री सीताराम केदिलाया, राष्ट्रीय सचिव श्री मेघराज जैन और मेघाघाट के श्रूष्ठानंद महाराज कबीर पंथी ने संबोधित किया । महाकौशल प्रांत के गौरवाध्यक्ष व समन्वय आश्रम के संस्थापक स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने उपस्थित गोभक्तों को गोरक्षा का संकल्प कराया ।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान कवर्धा के गोपालक श्री प्रमोद लूनिया और लोहरा के जैव कृषक श्री शिखर पटेल को सम्मानित किया गया ।</p>
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